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_qpaperback
040 _aNISER LIBRARY
_beng
_cNISER LIBRARY
082 _a172
_bSAP-K
100 _aसप्रे, स.आ.
245 _aकाम की प्रशंसा में
246 _aIn praise of work
_h(english)
260 _aनई दिल्ली :
_bराष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत,
_c1996.
300 _a69 Pages
520 _aकर्मयोग ही गीता का मुख्य उपदेश है। मनुष्य को जीवनपर्यंत सतत काम करना चाहिए। काम करने में ही व्यक्ति और समष्टि का विकास निहित है। काम करने से शरीर निरोग रहता है और मन प्रसन्न रहता है। कर्म प्रधान जीवन ही सुंदर होता है।
650 _aWork ethics
650 _aMoral duties
650 _aSocial responsibility
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_uhttps://www.goodreads.com/book/show/238553241-kaam-ki-prashansha-me?ref=nav_sb_ss_1_21#CommunityReviews
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