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_qPaperback
040 _aNISER LIBRARY
_beng
_cNISER LIBRARY
082 _a2-584
_bVIV-P
100 _aस्वामी विवेकानंद
245 _aप्रेमयोग
260 _aनई दिल्ली :
_bप्रभात प्रकाशन प्रा. लि.,
_c2024.
300 _a120 pages ;
_c20 cm.
520 _aसंसार में यह एक प्रेरक शक्ति है। मनुष्य जैसें -जैसें उन्नत्ति करता जायेगा, वैसें वैसें विवेक और प्रेम उसके जीवन में आदर्श बनते जायेंगे। भक्ति को अपना सर्वोच्च आदर्श बनाना चाहिए तथा संसार और इंद्रियों से धीरे धीरे अपना रास्ता बनाते हुए हमें ईश्वर तक पहुचना है अथार्थ् भक्ति, भक्त और भगवान तीनों एक है।
650 _aSpirituality
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_xPhilosophy
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_uhttps://www.goodreads.com/book/show/45570466-premyoga?ref=nav_sb_ss_1_13#CommunityReviews
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