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| 020 |
_a9788123714325 _qpaperback |
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| 040 |
_aNISER LIBRARY _beng _cNISER LIBRARY |
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| 082 |
_a792(540) _bVAT-P |
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| 100 | _aवात्स्यायन, कपिला | ||
| 245 |
_aपारंपरिक भारतीय रंगमंच : _bअनंत धाराएं |
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| 246 |
_aTraditional Indian theatre : _bmultiple streams _h(english) |
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| 260 |
_aनई दिल्ली : _bराष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत, _c1995. |
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| 300 |
_a200 pages : _billustrations (color and b/w photographs) ; _c24 cm. |
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| 520 | _aयह पुस्तक भारतीय नाट्य कलाओं के कुछ रूपों का पथदर्शी अध्ययन है, जो परंपरागत संदर्भ में न 'लोक' और न ही 'शास्त्रीय' आन-बान के हैं, बल्कि दोनों के मिश्रित तत्वों की अभिव्यक्ति हैं। चरित्र और अभिव्यक्ति में व्यापक रूप से विभिन्न अथवा भिन्न होते हुए भी ये आंगिक सशक्तता और विश्वदर्शिता दर्शाते हैं, जो परंपरा और विशिष्टता में भारतीय हैं। अनुभव का यही पुंज आधुनिक उपलब्धि में एक विशिष्ट कड़ी जोड़ता है। पुस्तक की विषयवस्तु यक्षगान, भागवतमेला, छऊ, नौटंकी, रामलीला सहित अन्य कई रूपों की जानकारी एवं मूल्यांकन प्रस्तुत करती है, जो संपूर्ण भारत, केरल से उत्तर प्रदेश और गुजरात से असम तक विद्यमान है। लेखिका ने इस जानकारी को प्रस्तुत करने के लिए न केवल पुरातत्व, पुस्तकें व रूढ़ परंपराओं का सहयोग लिया है, वरन् उन्होंने जो भी लिखा है, वह एक कलाकार के ज्ञान तथा अनुभव का परिणाम है। | ||
| 650 |
_aTheatre _zIndia |
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| 650 | _aPerformative arts | ||
| 650 | _aDance | ||
| 856 |
_3Reviews _uhttps://www.goodreads.com/book/show/238552865-paramparik-bhartiya-rangmanch?ac=1&from_search=true&qid=aZYyECsydh&rank=1#CommunityReviews |
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