| 000 | 03847 a2200289 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 003 | NISER | ||
| 005 | 20251208122902.0 | ||
| 008 | 251208b |||||||| |||| 00| 0 hin d | ||
| 020 |
_a9789355213501 _qPaperback |
||
| 040 |
_aNISER LIBRARY _beng _cNISER LIBRARY |
||
| 082 |
_a82-94 _bMAH-V |
||
| 100 | _aमाहुरकर, उदय | ||
| 245 | _aवीर सावरकर | ||
| 246 |
_aVeer Savarkar _h(english) |
||
| 260 |
_aनई दिल्ली : _bप्रभात प्रकाशन प्रा. लि., _c2025. |
||
| 300 |
_a352 pages : _billustrations (photographs) ; _c21 cm. |
||
| 520 | _aयदि भारत अपनी स्वाधीनता के 75वें वर्ष की ओर देखता है तो वह देश के विभाजन के 75वें वर्ष की ओर भी देखता है। यह संभवत: बीसवीं शताब्दी की विकटतम मानव त्रासदी थी, जिसने बड़े पैमाने पर अभूतपूर्व हिंसा देखी; और इस हिंसा की प्रणेता वे इच्छुक पार्टियाँ थीं, जिन्होंने अपने राजनीतिक एवं विचारधारात्मक कारणों से उसे भड़काया था। विभाजन की ओर प्रवृत्त करनेवाले वास्तविक कारणों का विश्लेषण करें तो उसका पाठ भारत की एकता एवं अखंडता में निहित है, जिसका प्रमाण वीर सावरकर द्वारा विभाजन को रोकने के लिए किए गए अथक प्रयासों में मिलता है। तार्किक रूप से भारत की राष्ट्रीय अखंडता के महानतम प्रतीक सावरकर को ओर से भारत की सुरक्षा के प्रति जो चेतावनियाँ दी गई थीं, वे विगत सात दशकों में सत्य सिद्ध हुई हैं। “वीर सावरकर” पुस्तक सावरकर जैसे तपोनिष्ठ चिंतक एवं भारत की सुरक्षा के जनक के उस पक्ष को प्रस्तुत करती है, जिससे भारत के विभाजन को रोका जा सकता था। इस पुस्तक में देश एवं उसकी नई पीढ़ी के समक्ष भारत विभाजन, जोकि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण हुआ था, को सत्य कथा को प्रस्तुत करने एवं इतिहास को परिवर्तित करने की उर्वरा है। आज देश को एकजुट बनाए रखने के लिए सावरकरवादी दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। | ||
| 600 |
_aSavarkar, Vinayak Damodar, _d(1883–1966) |
||
| 650 | _aBiography | ||
| 655 | _aNon-fiction | ||
| 700 | _aपंडित, चिरायु | ||
| 856 |
_3Reviews _uhttps://www.goodreads.com/book/show/61170296?ref=nav_sb_ss_1_13#CommunityReviews |
||
| 942 |
_cHC _2udc |
||
| 999 |
_c36336 _d36336 |
||