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| 020 |
_a9788126707669 _qPaperback |
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| 040 |
_aNISER LIBRARY _beng _cNISER LIBRARY |
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| 082 |
_a82-1 _bBIS-P |
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| 245 |
_aप्रतिनिधि कविताएँ : _bपरवीन शाकिर |
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| 260 |
_aनई दिल्ली : _bराजकमल प्रकाशन प्रा. लि., _c2024. |
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| 300 | _a142 pages | ||
| 520 | _aपाकिस्तान की उर्दू शायरी में परवीन शाकिर की गणना प्रेम की नाजुक मूर्ति के रूप में होती है। परवीन का प्रेम अपने अद्वितीय अन्दाज़ में ‘नर्म सुख़न’ बनकर फूटा है और अपनी ‘ख़ुशबू’ से उसने उर्दू शायरी की दुनिया को सराबोर कर दिया है। पाकिस्तान की ही प्रसिद्ध कवयित्री फ़हमीदा रियाज़ के अनुसार, ‘परवीन के शे’रों में लोकगीतों की सी सादगी और लय भी है और क्लासिकी मौसीकी (शास्त्रीय संगीत) की नफ़ासत और नज़ाकत भी। उसकी नज़्में और ग़ज़लें भोलेपन और सॉफ़िस्टिकेशन का दिलआवेज़ संगम हैं।’ परवीर शाकिर की शायरी का केन्द्रीय विषय ‘स्त्री’ है। प्रेम में टूटी हुई, बिखरी हुई खुद्दार स्त्री। लेकिन उसकी शायरी की यह कोई सीमा नहीं है। वस्तुतः परवीन की शायरी प्रेम की एक ऐसी लोरी है जो अपने मद्धिम-मद्धिम सुरों से सोते हुओं को जगाने का काम करती है। परवीन की शायरी में रूमानियत भी है और गहरी ऐंद्रिकता भी, पर कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि सामने की दुनिया सिर्फ़ एक सपना है। अपनी सूक्ष्म यथार्थपरकता के कारण ही मुख्य रूप से ‘स्त्री’ और ‘प्रेम’ को आधार बनाकर लिखी गई ये कविताएँ अनुभूति के व्यापक द्वार खोलती हैं। | ||
| 600 |
_aShakir, Praveen, _d(1952-1994), |
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| 650 |
_aHindi poetry _y20th century |
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| 655 | _aPoems | ||
| 700 |
_aबिस्मिल्लाह, अब्दुल _eeditor _etranslator _6880-02 |
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| 856 |
_3Reviews _uhttps://www.goodreads.com/book/show/27803095?ref=nav_sb_ss_1_13#CommunityReviews |
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| 999 |
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