| 000 | 03365 a2200253 4500 | ||
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| 020 |
_a9788126702299 _qPaperback |
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| 040 |
_aNISER LIBRARY _beng _cNISER LIBRARY |
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| 082 |
_a82-1 _bSHU-P |
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| 245 |
_aप्रतिनिधि कविताएँ : _bसर्वेश्वर दयाल सक्सेना |
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| 260 |
_aनई दिल्ली : _bराजकमल प्रकाशन प्रा. लि., _c2024. |
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| 300 | _a161 pages | ||
| 520 | _aसमकालीन हिन्दी कविता की व्यापक जनवादी चेतना और प्रगतिशील जीवन-मूल्यों के सन्दर्भ में सर्वेश्वर एक ऐसे कवि के रूप में सुपरिचित हैं जिनकी रचनाएँ पाठकों से बराबर धड़कता हुआ रिश्ता बनाए हुए हैं। उनकी कविताएँ नई कविता की ऊहा और आत्मग्रस्तता से बड़ी हद तक मुक्त रही हैं। इस संग्रह में उनके समूचे काव्य-कृतित्व से महत्त्वपूर्ण कविताएँ संकलित की गई हैं। जिन्दगी के बड़े सरोकारों से जुड़ी उनकी कविताएँ उन शक्तियों का विरोध करती हैं जो उसे किसी भी स्तर पर कुरूप करने के लिए जिम्मेदार हैं। वे घेरों के बाहर के कवि हैं। उनकी कविताओं में हिन्दी कविता का लोकोन्मुख जातीय संस्कार घनीभूत रूप में मौजूद है और उन्हें न तो राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों से काटकर देखा जा सकता है और न कवि के अपने आत्मसंघर्ष को नकारकर। वस्तुतः दुख और गहन मानवीय करुणा से प्रेरित संघर्षशीलता, उदात्त सौन्दर्यबोध, मधुर भावनाओं के सन्धि संस्पर्श और 'फॉर्म' की छन्दाछन्द विभिन्न मुद्राएँ इन कविताओं को व्यापक अर्थ में मूल्यवान बनाती हैं। | ||
| 600 |
_aSaxena, Sarveshwar Dayal, _d(1927–1983) |
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| 650 |
_aHindi poetry _y20th century |
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| 655 | _aPoems | ||
| 700 |
_aशुक्ला, प्रयाग _eeditor _6880-02 |
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| 856 |
_3Reviews _uhttps://www.goodreads.com/book/show/36580787?ref=nav_sb_ss_1_13#CommunityReviews |
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| 942 |
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| 999 |
_c36318 _d36318 |
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