| 000 | 03428 a2200253 4500 | ||
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| 003 | NISER | ||
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| 020 |
_a9788126704255 _qPaperback |
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| 040 |
_aNISER LIBRARY _beng _cNISER LIBRARY |
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| 082 |
_a82-1 _bVAJ-P |
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| 245 |
_aप्रतिनिधि कविताएँ : _bगजानन मा. मुक्तिबोध |
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| 260 |
_aनई दिल्ली : _bराजकमल प्रकाशन प्रा. लि., _c2023. |
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| 300 |
_a185 pages ; _c18 cm. |
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| 520 | _aमुक्तिबोध की कविता अपने समय का जीवित इतिहास है : वैसे ही, जैसे अपने समय में कबीर, तुलसी और निराला की कविता। हमारे समय का यथार्थ उनकी कविता में पूरे कलात्मक सन्तुलन के साथ मौजूद है। उनकी कल्पना वर्तमान से सीधे टकराती है, जिसे हम फ़न्तासी की शक्ल में देखते हैं। नई कविता की पायेदार पहचान बनकर भी उनकी कविता उससे आगे निकल जाती है, क्योंकि समकालीन जीवन के हॉरर की तीव्रतम अभिव्यक्ति के बावजूद वह एक गहरे आत्मविश्वास की उपज है। चीज़ों को वे मार्क्सवादी नज़रिए से देखते हैं, इसीलिए उनकी कविताएँ सामाजिक यथार्थ के परस्पर गुम्फित तत्त्वों और उनके गतिशील यथार्थ की पहचान कराने में समर्थ हैं। वे आज की तमाम अमानवीयता के विरुद्ध मनुष्य की अन्तिम विजय का भरोसा दिलाती हैं। इस संग्रह में, जिसे मुक्तिबोध और उनके साहित्यिक अवद्वान की गहरी पहचान रखनेवाले सुपरिचित कवि, समीक्षक अशोक वाजपेयी ने संकलित-सम्पादित किया है, उनकी प्रायः वे सभी कविताएँ संगृहीत हैं, जिनके लिए वे बहुचर्चित हुए हैं, और जो प्रगतिशील हिन्दी कविता की पुख्ता पहचान बनी हुई हैं। | ||
| 600 |
_aMuktibodh, Gajanan Madhav, _d(1917– 1964) |
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| 650 |
_aHindi poetry _y20th century |
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| 655 | _aPoems | ||
| 700 |
_aवाजपेयी, अशोक _eeditor _6880-02 |
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| 856 |
_3Reviews _uhttps://www.goodreads.com/book/show/18849798#CommunityReviews |
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| 942 |
_cHC _2udc |
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| 999 |
_c36313 _d36313 |
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