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020 _a9789390971695
_qPaperback
040 _aNISER LIBRARY
_beng
_cNISER LIBRARY
082 _a82-1
_bNIR-P
245 _aप्रतिनिधि कविताएँ :
_bसूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
260 _aनई दिल्ली :
_bराजकमल प्रकाशन प्रा. लि.,
_c2025.
300 _a158 pages ;
_c17 cm.
520 _aदुर्धर्ष भाग्य और क्षुद्र समय से आजीवन घिरे रहे महा-कवि और महा-प्राण मनुष्य निराला ने हिन्दी कविता को अपने ही हाथों वह दे दिया जिसे अर्जित करने में युगों की प्रतिभा और शक्ति व्यय हो जाती है। छायावाद के दौर में ही उन्होंने एक कदम बढ़कर मुक्त छन्द में यथार्थवादी कविता को सम्भव किया तो स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान और आजादी के बाद भारतीय राजनीति तथा समाज की स्थितियों को लक्षित कर कविताएँ और उपन्यासों की रचना भी की। 'सरोज स्मृति' और 'राम की शक्तिपूजा' जैसी कविताओं से उन्होंने कविता की सामर्थ्य के नए मानक गढ़े, तो गीतों में परम्परा, प्रयोग और लोकचेतना के असंख्य अर्थसघन बिम्ब अगली पीढ़ियों के लिए छोड़े। लेकिन यह नवीनता और प्रयोगधर्मिता किसी मामूली चमत्कार-प्रियता का परिणाम नहीं थी, यह निश्चय ही दुख के ताप से नित नूतन होते उनके मन का स्वाभाविक प्रवाह रहा होगा जो क्षणों की अवधि में वर्षों-दशकों को लाँघता चलता है। उनकी प्रतिनिधि कविताओं के इस संकलन में प्रयास किया गया है कि पाठक निराला के विराट कृतित्व के कुछ सबसे दीप्तिमान शिखरों का साक्षात्कार कर सके।
600 _a'Nirala', Suryakant Tripathi,
_d1899-1961
650 _aHindi poetry
655 _aPoems
700 _aनिराला, विवेक
_eeditor
_6880-02
856 _3Reviews
_uhttps://www.goodreads.com/book/show/230185194-pratinidhi-kavitayen?ref=nav_sb_ss_1_13#CommunityReviews
942 _cHC
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