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020 _a9788183227414
_qPaperback
040 _aNISER LIBRARY
_beng
_cNISER LIBRARY
082 _a82-1
_bAKH-K
100 _aअख़्तर, जावेद
245 _aख़्वाब के गाँव में
260 _aनोएडा :
_bमंजुल पब्लिशिंग हाउस,
_c2017.
300 _a70 pages :
_billustrations (b/w drawings)
520 _aजावेद अख़्तर जिंदगी के दिन-रात की आपाधापी. अच्छे-बुरे, सुख-दुःख, ख़ुशी और ग़म को फिल्म के सीने की तरह दर्शक के नज़रिये से देखते हैं. वे तमाम हालात जो ज़िन्दगी को चाहे खुशनुमा बनाते हों या फिक्रमंद और परेशां करते हों, उनको मुक्त भाव से जीते हैं और उनकी शख्शियत का यह कोण उन्हें दार्शनिकों की पंक्ति में खड़ा कर देता है. इस किताब में उनकी ही कही और लिखी बातों को लिया गया है, और हमें इसमें उनके द्वारा गहराई से महसूस की गई अभिव्यक्तियाँ मिलेंगी.
650 _aPoetry
856 _3Reviews
_uhttps://www.goodreads.com/book/show/34363311?ref=nav_sb_ss_1_13#CommunityReviews
942 _cHC
_2udc
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