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मध्यप्रदेश

By: Publication details: नई दिल्ली : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत, 2012.Description: 379 Pages : illustrations (color photographs) ; 21 cmISBN:
  • 9788123763590
Subject(s): DDC classification:
  • 94(540.49) PAT-M
Online resources: Summary: एक नवंबर 1956 को आकार लेने वाला मध्यप्रदेश केवल मानचित्र में बीचों बीच में होने के कारण ही भारत का हृदय प्रदेश नहीं कहा जाता है, यह प्रकृति, इतिहास, संस्कृति, विकास; सभी क्षेत्रों में देश की धड़कन है। यहां विश्व प्रसिद्ध खजुराहो के मंदिर और सांची के स्तूप पूरी दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं तो यहां के वन और वन्य जीव नैसर्गिक संदरता के रसिकों के मन में बसते हैं। इस प्रदेश की भूमि पर मानव की विकास यात्रा के पद चिन्ह यहां-वहां बिखरे हुए हैं। कई नदियों का मायका होने के साथ-साथ यह प्रदेश पारंपरिक जल निधियों का संरक्षण स्थल भी है। यह पुस्तक मध्यप्रदेश के अतीत, भूमि और मौसम, सामाजिक व्यवस्था, खानपान और बोलियां, पहनावा, शिल्प, वन्य जीवन, खनिज, पत्रकारिता, मेले, संगीत, पुरातत्व, विभूतियों आदि के बारे में प्रामाणिक जानकारी देती है। लिखित सामग्री को कई चित्रों के साथ सज्जित किया गया है। इसकी भाषा बेहद, सहज, प्रवाहमय और कथा की तरह प्रतीत होती है।
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Hindi Collection Hindi Collection NISER LIBRARY 1st Floor - Hindi Collection 94(540.49) PAT-M (Browse shelf(Opens below)) Available 26105

एक नवंबर 1956 को आकार लेने वाला मध्यप्रदेश केवल मानचित्र में बीचों बीच में होने के कारण ही भारत का हृदय प्रदेश नहीं कहा जाता है, यह प्रकृति, इतिहास, संस्कृति, विकास; सभी क्षेत्रों में देश की धड़कन है। यहां विश्व प्रसिद्ध खजुराहो के मंदिर और सांची के स्तूप पूरी दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं तो यहां के वन और वन्य जीव नैसर्गिक संदरता के रसिकों के मन में बसते हैं। इस प्रदेश की भूमि पर मानव की विकास यात्रा के पद चिन्ह यहां-वहां बिखरे हुए हैं। कई नदियों का मायका होने के साथ-साथ यह प्रदेश पारंपरिक जल निधियों का संरक्षण स्थल भी है। यह पुस्तक मध्यप्रदेश के अतीत, भूमि और मौसम, सामाजिक व्यवस्था, खानपान और बोलियां, पहनावा, शिल्प, वन्य जीवन, खनिज, पत्रकारिता, मेले, संगीत, पुरातत्व, विभूतियों आदि के बारे में प्रामाणिक जानकारी देती है। लिखित सामग्री को कई चित्रों के साथ सज्जित किया गया है। इसकी भाषा बेहद, सहज, प्रवाहमय और कथा की तरह प्रतीत होती है।

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