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चंबल : संस्कृति एवं विरासत

By: Publication details: नई दिल्ली : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत, 2023.Description: 144 Pages : illustrations (color photographs) ; 21 cmISBN:
  • 9789354917974
Subject(s): DDC classification:
  • 930.85(540.49) SHR-C
Online resources: Summary: चंबल का नाम आते ही आँखों के सामने ऊबड़-खाबड़ भूमि, झाड़ियाँ-कँटीले वृक्ष और हाथों में बंदूक, सिर पर पगड़ी पहने डाकुओं की एक तस्वीर उभरती है। उल्लेखनीय है कि इसी क्षेत्र के दस्युओं ने देश की आजादी में भी अहम भूमिका निभाई है। देश के सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास में चंबल अंचल का अविस्मरणीय योगदान है। इसके अलावा यह क्षेत्र प्रागैतिहासिक काल से समृद्ध रहा है। यहाँ के बीहड़ों में रची-बसी संस्कृति के विविध रंग हैं। आदिकाल से यह धर्म और अध्यात्म का केंद्र रहा है। शैव मंदिरों व मठों और जैन देवालयों की मौजूदगी इसके ठोस साक्ष्य हैं। चंबल में पुरातत्व और पर्यटन का खजाना भी है। यहाँ अब तक सौ से अधिक पाषाणयुगीन अवशेष मिल चुके हैं। यहाँ की जैविक संपदा और जैवविविधता देश में अलग स्थान रखते हैं। इस भूभाग पर प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों के साथ ही वन, पहाड़, पठार, झील, नदियों की श्रृंखला आदि के कारण यहाँ सभी प्रकार के जंतुओं की रिहाइश और संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवास व खाद्य पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। चंबल संभाग में तीन जिले हैं-भिंड, मुरैना और श्योपुर जिला। यह पुस्तक चंबल नदी के उद्गम; इससे जुड़े मिथक और किंवदंतियों; प्रागैतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक अतीत; यहाँ के दुर्ग और गढ़ियों; पारिस्थितिकी तंत्र व अभयारण्य; स्वतंत्रता आंदोलन और यहाँ के लोक संस्कृति-साहित्य से रू-ब-रू कराती है।
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Hindi Collection Hindi Collection NISER LIBRARY 1st Floor - Hindi Collection 930.85(540.49) SHR-C (Browse shelf(Opens below)) Available 26071

चंबल का नाम आते ही आँखों के सामने ऊबड़-खाबड़ भूमि, झाड़ियाँ-कँटीले वृक्ष और हाथों में बंदूक, सिर पर पगड़ी पहने डाकुओं की एक तस्वीर उभरती है। उल्लेखनीय है कि इसी क्षेत्र के दस्युओं ने देश की आजादी में भी अहम भूमिका निभाई है। देश के सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास में चंबल अंचल का अविस्मरणीय योगदान है। इसके अलावा यह क्षेत्र प्रागैतिहासिक काल से समृद्ध रहा है। यहाँ के बीहड़ों में रची-बसी संस्कृति के विविध रंग हैं। आदिकाल से यह धर्म और अध्यात्म का केंद्र रहा है। शैव मंदिरों व मठों और जैन देवालयों की मौजूदगी इसके ठोस साक्ष्य हैं। चंबल में पुरातत्व और पर्यटन का खजाना भी है। यहाँ अब तक सौ से अधिक पाषाणयुगीन अवशेष मिल चुके हैं। यहाँ की जैविक संपदा और जैवविविधता देश में अलग स्थान रखते हैं। इस भूभाग पर प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों के साथ ही वन, पहाड़, पठार, झील, नदियों की श्रृंखला आदि के कारण यहाँ सभी प्रकार के जंतुओं की रिहाइश और संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवास व खाद्य पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। चंबल संभाग में तीन जिले हैं-भिंड, मुरैना और श्योपुर जिला। यह पुस्तक चंबल नदी के उद्गम; इससे जुड़े मिथक और किंवदंतियों; प्रागैतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक अतीत; यहाँ के दुर्ग और गढ़ियों; पारिस्थितिकी तंत्र व अभयारण्य; स्वतंत्रता आंदोलन और यहाँ के लोक संस्कृति-साहित्य से रू-ब-रू कराती है।

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