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कर्मभूमि

By: Publication details: नई दिल्ली : Fingerprinti Hindi, प्रकाश बुक्स, 2025.Description: 376 pages ; 19 cmISBN:
  • 9789389053838
Subject(s): Genre/Form: DDC classification:
  • 82-3:17 PRE-K
Online resources: Summary: मुंशी प्रेमचंद ने 'कर्मभूमि' के माध्यम से समाज में व्याप्त वर्ग-विभाजन की त्रासदी पर प्रकाश डाला है। वर्ग-विभाजन से उपजी निराशा ने सामाजिक ताने-बाने को वर्ग-संघर्ष के द्वारा झकझोरने का प्रयास किया है। तत्कालीन गुलाम भारत में किसान और निम्न वर्ग की दयनीय दशा का जैसा हृदय विदारक और यथार्थ चित्रण 'कर्मभूमि' की कथावस्तु बना, उसके आंशिक दर्शन आज भी आजाद भारत की भूमि पर दुर्लभ नहीं हैं। अंग्रेजों के अत्याचारों से त्रस्त जनता जब 'त्राहि-त्राहि' कर रही थी और उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही थी तो अंग्रेजों की चाकरी करने वाला और निर्दयी दमन का प्रतीक एक अफसर ही एकाएक जनता का हितैषी बनकर उसका नेतृत्व करने लगता है। 'कर्मभूमि' में न केवल वर्गों के, वरन् स्त्री-पुरुष के मानवीय एवं जातीय भेदों और उनके समन्वयों को समुचित परिवेश में रखकर प्रस्तुत किया गया है। यहां तक कि पाठक पात्रों के साथ एकाकार होकर हंसने, रोने, नाचने, गाने और शोक, क्षोभ करते हुए भावाभिभूत हो उठता है।
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Item type Current library Call number Status Barcode
Hindi Collection Hindi Collection NISER LIBRARY 1st Floor - Hindi Collection 82-3:17 PRE-K (Browse shelf(Opens below)) Available 26208

मुंशी प्रेमचंद ने 'कर्मभूमि' के माध्यम से समाज में व्याप्त वर्ग-विभाजन की त्रासदी पर प्रकाश डाला है। वर्ग-विभाजन से उपजी निराशा ने सामाजिक ताने-बाने को वर्ग-संघर्ष के द्वारा झकझोरने का प्रयास किया है।

तत्कालीन गुलाम भारत में किसान और निम्न वर्ग की दयनीय दशा का जैसा हृदय विदारक और यथार्थ चित्रण 'कर्मभूमि' की कथावस्तु बना, उसके आंशिक दर्शन आज भी आजाद भारत की भूमि पर दुर्लभ नहीं हैं। अंग्रेजों के अत्याचारों से त्रस्त जनता जब 'त्राहि-त्राहि' कर रही थी और उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही थी तो अंग्रेजों की चाकरी करने वाला और निर्दयी दमन का प्रतीक एक अफसर ही एकाएक जनता का हितैषी बनकर उसका नेतृत्व करने लगता है।

'कर्मभूमि' में न केवल वर्गों के, वरन् स्त्री-पुरुष के मानवीय एवं जातीय भेदों और उनके समन्वयों को समुचित परिवेश में रखकर प्रस्तुत किया गया है। यहां तक कि पाठक पात्रों के साथ एकाकार होकर हंसने, रोने, नाचने, गाने और शोक, क्षोभ करते हुए भावाभिभूत हो उठता है।

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