TY - GEN AU - स्वामी विवेकानंद TI - प्रेमयोग SN - 9789350486061 U1 - 2-584 PY - 2024/// CY - नई दिल्ली PB - प्रभात प्रकाशन प्रा. लि. KW - Spirituality KW - Hinduism KW - Philosophy N2 - संसार में यह एक प्रेरक शक्ति है। मनुष्य जैसें -जैसें उन्नत्ति करता जायेगा, वैसें वैसें विवेक और प्रेम उसके जीवन में आदर्श बनते जायेंगे। भक्ति को अपना सर्वोच्च आदर्श बनाना चाहिए तथा संसार और इंद्रियों से धीरे धीरे अपना रास्ता बनाते हुए हमें ईश्वर तक पहुचना है अथार्थ् भक्ति, भक्त और भगवान तीनों एक है। UR - https://www.goodreads.com/book/show/45570466-premyoga?ref=nav_sb_ss_1_13#CommunityReviews ER -