पाँचवीं दिशा
Publication details: दिल्ली : भावना प्रकाशन, 2020.Description: 160 pagesISBN:- 9788176673938
- 821.214.21 SUP-P
| Item type | Current library | Call number | Status | Barcode | |
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Hindi Collection
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NISER LIBRARY 1st Floor - Hindi Collection | 821.214.21 SUP-P (Browse shelf(Opens below)) | Available | 26060 |
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समकालीन कहानी और कविता दोनों में ही अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले प्रतिष्ठित रचनाकार सुशांत सुप्रिय के नए कथा संग्रह 'पाँचवीं दिशा' की रोचक कहानियाँ पाठकों को शुरू से अंत तक बाँधे रखने की क्षमता रखती हैं। लगातार बदतर होते जा रहे इस अराजक और जन-विरोधी समय की विसंगतियों, विद्रूपताओं और विषमताओं को खंगालती ये कहानियाँ अन्याय, शोषण, अत्याचार और अमानवीयता का खुला प्रतिवाद करती हैं। उनकी कहानियों में दुनियां के भीतर एक नयी दुनियां निर्मित होती दिखाई देगी। ये कहानियाँ अपने समय के ज्वलंत प्रश्नों से सीधी मुठभेड़ करती हैं। जीवन के खुरदरे यथार्थ को उद्घाटित करती ये कहानियाँ जाति-व्यवस्था की जकड़बंदी और धार्मिक असहिष्णुता का पुरजोर विरोध करती हैं। उनके पास व्यावहारिक, प्रभावी और सर्वग्राही भाषा है तो शिल्प में सादगी के साथ संवेदनात्मक गहराई भी। इस अवसरवादी युग में मूल्यों और आदर्शों के ह्रास तथा नैतिकता के स्खलन का भी ये कहानियाँ प्रतिवाद करती हैं। सामाजिक सरोकारों से जुड़ी इन कहानियों का कथ्य प्रभावी है व झकझोरने में समर्थ है। ये सतसैया के दोहों की तरह 'देखन में छोटी लागें, घाव करें गम्भीर' की कहानियाँ हैं। सुशांत सुप्रिय के कहन का अंदाज अलहदा है । सुशांत के भीतर का सफल कवि उनकी कथा-यात्रा में साथ चलता है। उनकी भाषा अद्भुत व उनका शिल्प जीवंत व प्रभावशाली है। कहानियों में मिथकों, बिम्बों और प्रतीकों का सटीक प्रयोग हुआ है। कई जगह किस्सागोई की शैली कहानियों में चार चाँद लगा देती है। पठनीयता की कसौटी पर पूरी तरह से खरी उतरने वाली ये कहानियाँ समकालीन हिंदी साहित्य को समृद्ध करती हैं।
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