तरकश
Publication details: नई दिल्ली : राजकमल प्रकाशन प्रा. लि., 2025.Description: 167 pagesISBN:- 9788126707263
- 82-1 AKH-T
| Item type | Current library | Call number | Status | Barcode | |
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Hindi Collection
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NISER LIBRARY 1st Floor - Hindi Collection | 82-1 AKH-T (Browse shelf(Opens below)) | Available | 26052 | |
Hindi Collection
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NISER LIBRARY 1st Floor - Hindi Collection | 82-1 AKH-T (Browse shelf(Opens below)) | Available | 22355 |
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| 82-1 AKH-K ख़्वाब के गाँव में | 82-1 AKH-L लावा | 82-1 AKH-T तरकश | 82-1 AKH-T तरकश | 82-1 BAC-M मधुशाला / Madhushala | 82-1 BAC-M मेरी श्रेष्ठ कविताएँ / Meri shreshtha kavitayen | 82-1 BAC-S सतरंगिनी / Satrangini |
जावेद एक अच्छे बोलनेवाले, एक अच्छे सोचनेवाले, काव्य-समर्थ उत्तर-आधुनिक कवि हैं। ताज़गी, गहराई और विविधता, भावनाओं की ईमानदारी और ज़िन्दगी में नए भावों की तलाश उनकी शायरी की विशेषताएँ हैं। नाजुक-ख़याली और फ़सीहुल-बयानी उनको विरासत में मिली है। वह कभी-कभी पारम्परिक शे'र कह लें मगर बुरी शायरी नहीं कर सकते। 'तरकश' ग़मे-जानाँ और ग़मे-दौराँ के तीरों से भरा है। बचपन की मीठी या कड़वी यादें हर अदीब या शायर के लिए स्थायी साबित हुई हैं। जावेद अख़्तर की चन्द ऐसी नज़्में जो उनकी ज़ख़्मी भावनाओं और अनुभूतियों का दर्पण हैं, पारदर्शी आत्मकथा के तौर पर पढ़ी जा सकती हैं। जावेद ने अचेत रूप में उर्दू कल्चर के जरिए इस सूफ़ी तहज़ीब की ख़ास विशेषताओं यानी धर्मनिरपेक्ष और मानवप्रेमी मूल्यों को भी कुबूल किया है। उनका वैल्यू सिस्टम सही है और वह बुनियादी तौर पर प्रगतिशील हैं। - कुर्रतुल ऐन हैदर
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