राजयोग
Publication details: नई दिल्ली : प्रभात प्रकाशन प्रा. लि., 2025.Description: 199 pages ; 20 cmISBN:- 9789350486085
- 2-584 VIV-R
| Item type | Current library | Call number | Status | Barcode | |
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Hindi Collection
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NISER LIBRARY 1st Floor - Hindi Collection | 2-584 VIV-R (Browse shelf(Opens below)) | Available | 26184 |
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| 2-584 VIV-G ज्ञानयोग | 2-584 VIV-K कर्मयोग | 2-584 VIV-P प्रेमयोग | 2-584 VIV-R राजयोग | 316.344.23 KHA-E एक देश बारह दुनिया / Ek desh barah duniya | 316.422.44 KAL-M मेरे सपनों का भारत / Mere sapanon ka bharat | 316.7 NAR-N आदिवासी लोक-समाज : कुछ अनुभव, कुछ अनुभूति / Adivasi lok-samaj : kuch anubhav, kuch anubhuti |
राजयोग-विद्या इस सत्य को प्राप्त करने के लिए, मानव के समक्ष यथार्थ, व्यावहारिक और साधनोपयोगी वैज्ञानिक प्रणाली रखने का प्रस्ताव करती है। पहले तो प्रत्येक विद्या के अनुसंधान और साधन की प्रणाली पृथक्-पृथक् है। यदि तुम खगोलशास्त्री होने की इच्छा करो और बैठे-बैठे केवल ‘खगोलशास्त्र खगोलशास्त्र’ कहकर चिल्लाते रहो, तो तुम कभी खगोलशास्त्र के अधिकारी न हो सकोगे। रसायनशास्त्र के संबंध में भी ऐसा ही है; उसमें भी एक निर्दिष्ट प्रणाली का अनुसरण करना होगा; प्रयोगशाला में जाकर विभिन्न द्रव्यादि लेने होंगे, उनको एकत्र करना होगा, उन्हें उचित अनुपात में मिलाना होगा, फिर उनको लेकर उनकी परीक्षा करनी होगी, तब कहीं तुम रसायनविज्ञ हो सकोगे। यदि तुम खगोलशास्त्रज्ञ होना चाहते हो, तो तुम्हें वेधश
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