प्रतिनिधि कविताएँ : सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
Publication details: नई दिल्ली : राजकमल प्रकाशन प्रा. लि., 2025.Description: 158 pages ; 17 cmISBN:- 9789390971695
- 82-1 NIR-P
| Item type | Current library | Call number | Status | Barcode | |
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Hindi Collection
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NISER LIBRARY 1st Floor - Hindi Collection | 82-1 NIR-P (Browse shelf(Opens below)) | Available | 26162 |
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| 82-1 KAL-J जीवन वृक्ष / Jeevan vriksh | 82-1 LUD-T तल्ख़ियां | 82-1 MIS-B Baisipahacha | 82-1 NIR-P प्रतिनिधि कविताएँ : सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' | 82-1 PAN-M Mahaprasad | 82-1 PAT-A Akash ke kathghare me suraj ki jirah | 82-1 PAT-B Barsha |
दुर्धर्ष भाग्य और क्षुद्र समय से आजीवन घिरे रहे महा-कवि और महा-प्राण मनुष्य निराला ने हिन्दी कविता को अपने ही हाथों वह दे दिया जिसे अर्जित करने में युगों की प्रतिभा और शक्ति व्यय हो जाती है। छायावाद के दौर में ही उन्होंने एक कदम बढ़कर मुक्त छन्द में यथार्थवादी कविता को सम्भव किया तो स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान और आजादी के बाद भारतीय राजनीति तथा समाज की स्थितियों को लक्षित कर कविताएँ और उपन्यासों की रचना भी की। 'सरोज स्मृति' और 'राम की शक्तिपूजा' जैसी कविताओं से उन्होंने कविता की सामर्थ्य के नए मानक गढ़े, तो गीतों में परम्परा, प्रयोग और लोकचेतना के असंख्य अर्थसघन बिम्ब अगली पीढ़ियों के लिए छोड़े। लेकिन यह नवीनता और प्रयोगधर्मिता किसी मामूली चमत्कार-प्रियता का परिणाम नहीं थी, यह निश्चय ही दुख के ताप से नित नूतन होते उनके मन का स्वाभाविक प्रवाह रहा होगा जो क्षणों की अवधि में वर्षों-दशकों को लाँघता चलता है। उनकी प्रतिनिधि कविताओं के इस संकलन में प्रयास किया गया है कि पाठक निराला के विराट कृतित्व के कुछ सबसे दीप्तिमान शिखरों का साक्षात्कार कर सके।
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