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काम की प्रशंसा में

सप्रे, स.आ.

काम की प्रशंसा में In praise of work (english) - नई दिल्ली : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत, 1996. - 69 Pages

कर्मयोग ही गीता का मुख्य उपदेश है। मनुष्य को जीवनपर्यंत सतत काम करना चाहिए। काम करने में ही व्यक्ति और समष्टि का विकास निहित है। काम करने से शरीर निरोग रहता है और मन प्रसन्न रहता है। कर्म प्रधान जीवन ही सुंदर होता है।


9788123723594


Work ethics
Moral duties
Social responsibility

172 / SAP-K