काला हंस
माँन, टॉमस
काला हंस - दिल्ली : जनबानी प्रकाशन प्रा. लि., 2022. - 100 pages
यह उपन्यास 'काला हंस' नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विश्व प्रसिद्ध लेखक श्री टॉमस मान के विश्वविख्यात उपन्यास 'बुडेन ब्रुक्स' का हिन्दी रूपान्तर है। यह एक सामाजिक उपन्यास है, जिसका सन्देश है- 'समय से पीछे रहना और प्रगति के विमुख होना मानव जीवन के लिए दुखद होता है।' उपन्यास की नायिका श्रीमती रोज़ेलिवान टमूलर एक विधवा है, जो 10 वर्ष पूर्व विधवा हुई थी। उसके पति सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल थे लेकिन मोटर दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। उसके पास एक पुत्री और एक पुत्र हैं, पुत्री को ललित कला एकेडेमी में शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से वह अपने शहर को छोड़कर डजेल डार्फ शहर में आ जाती है, जो प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध है। श्री टॉमसन अपने महामानववादी दर्शन के लिए जाने जाते हैं। समाज में यदि कहीं भी और किंचित भी अमानवीय घटित हो रहा होता है, तो वे उसे अपनी लेखनी का मुख्य विषय बनाकर कथा के रूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत करके समाज को नई दिशा देने का सफल प्रयास करते हैं। इस उपन्यास में नायिका की बेटी ऐना का पैर खराब होने के कारण उसके मित्र लोग उससे किस प्रकार प्रेम-सम्बन्ध बनाने में कतराते हैं, समाज में उसे किस रूप में देखा जाता था, इन सबका बारीक दृष्टि से चित्रण इस कृति की विशेषता है। इस उपन्यास की कथावस्तु अत्यन्त रोचक शैली में प्रस्तुत की गई है। प्रकृति जनित प्रेम की पराकाष्ठा जब पात्रों के मानस में हिलोरें लेती है, उस समय संवेदनाओं के ज्वार पात्रों को प्रकृति के अनन्त रूपों की स्मृति में सराबोर कर देते हैं। इस कृति में 'काला हंस' नामक पक्षी समाज में फैली रूढ़ियों, अन्धविश्वासों और अमानवीय संवेदनाओं के प्रतीक रूप में तत्कालीन समाज की प्रदूषित व्यवस्था का चित्रण करता है। रोचक और मधुर शैली में लिखा यह उपन्यास अब तक विश्व की अनेक भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है। हिन्दी रूपान्तरकार ने जिस कौशल के साथ इसका अनुवाद किया है, वह लगता नहीं कि अनुवाद है। मूल पाठ जैसा आनन्ददायक यह उपन्यास निश्चिय ही पठनीय और संग्रहणीय है।
9789380628547
Fiction
Historical Fiction
82-3 / MAN-K
काला हंस - दिल्ली : जनबानी प्रकाशन प्रा. लि., 2022. - 100 pages
यह उपन्यास 'काला हंस' नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विश्व प्रसिद्ध लेखक श्री टॉमस मान के विश्वविख्यात उपन्यास 'बुडेन ब्रुक्स' का हिन्दी रूपान्तर है। यह एक सामाजिक उपन्यास है, जिसका सन्देश है- 'समय से पीछे रहना और प्रगति के विमुख होना मानव जीवन के लिए दुखद होता है।' उपन्यास की नायिका श्रीमती रोज़ेलिवान टमूलर एक विधवा है, जो 10 वर्ष पूर्व विधवा हुई थी। उसके पति सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल थे लेकिन मोटर दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। उसके पास एक पुत्री और एक पुत्र हैं, पुत्री को ललित कला एकेडेमी में शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से वह अपने शहर को छोड़कर डजेल डार्फ शहर में आ जाती है, जो प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध है। श्री टॉमसन अपने महामानववादी दर्शन के लिए जाने जाते हैं। समाज में यदि कहीं भी और किंचित भी अमानवीय घटित हो रहा होता है, तो वे उसे अपनी लेखनी का मुख्य विषय बनाकर कथा के रूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत करके समाज को नई दिशा देने का सफल प्रयास करते हैं। इस उपन्यास में नायिका की बेटी ऐना का पैर खराब होने के कारण उसके मित्र लोग उससे किस प्रकार प्रेम-सम्बन्ध बनाने में कतराते हैं, समाज में उसे किस रूप में देखा जाता था, इन सबका बारीक दृष्टि से चित्रण इस कृति की विशेषता है। इस उपन्यास की कथावस्तु अत्यन्त रोचक शैली में प्रस्तुत की गई है। प्रकृति जनित प्रेम की पराकाष्ठा जब पात्रों के मानस में हिलोरें लेती है, उस समय संवेदनाओं के ज्वार पात्रों को प्रकृति के अनन्त रूपों की स्मृति में सराबोर कर देते हैं। इस कृति में 'काला हंस' नामक पक्षी समाज में फैली रूढ़ियों, अन्धविश्वासों और अमानवीय संवेदनाओं के प्रतीक रूप में तत्कालीन समाज की प्रदूषित व्यवस्था का चित्रण करता है। रोचक और मधुर शैली में लिखा यह उपन्यास अब तक विश्व की अनेक भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है। हिन्दी रूपान्तरकार ने जिस कौशल के साथ इसका अनुवाद किया है, वह लगता नहीं कि अनुवाद है। मूल पाठ जैसा आनन्ददायक यह उपन्यास निश्चिय ही पठनीय और संग्रहणीय है।
9789380628547
Fiction
Historical Fiction
82-3 / MAN-K